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| साभार गूगल |
रिपोर्ट - मानस चतुर्वेदी
-यूपी के फतेहपुर जिले में एक दिवसीय दौरे में आए प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की साथ ही कार्यकर्ताओं को आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव के तैयारियों को लेकर चर्चा की वहीं उन्होंने इंडिया गठबंधन पर पलटवार करते हुए कहा की इंडिया और एनडीए का जो मामला है इंडिया कुछ नहीं हैं इंडिया यूपीए का कब्रिस्तान है जिसे नाम बदलने की आवश्कता पड़ी है और इसलिए जितने भ्रष्टाचार और घोटाले थे इस पर फिर से पर्दा पड़ जाए अपने देखा की 2017 में सपा कांग्रेस के साथ आई तो 100 सीट दिया था और 300 यह लड़े थे और 100 वह लड़े थे कांग्रेस का पाप जैसे सपा पर सवार हुआ तो देखो सपा हाफ हो गई एक बार और कांग्रेस पर सवार हो जाए बचा खुचा साफ हो जाएगी। वही जनगणना होनी चाहिए लेकिन विसंगति दूर होनी चाहिए ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी को मार दो मैं 1961 में 70 लाख था और उसी में जिन के हमें 7 हजार कर दिया तो मारने वाली जनगणना कोई कराना चाहेगा कोई जाति करना नहीं मेरे पास रिकॉर्ड है मैंने आपको रिकॉर्ड दिखाया 1961 में हम 70 लाख थे और हमारे परिणाम को पचड़े में डाल दिया हम 7 हजार हो गए कम करने वाली जनगणना नहीं होनी चाहिए। वहीं उन्होंने अखिलेश द्वारा जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस पर उठाए गए सवाल पर पलटवार करते हुए कहा की अगर कांग्रेस गलत थी 2004 से 2014 तक साथ देकर हमलोगों को बर्बाद किया गया उसी समय फाइल गायब कराई गई उसी समय हमारे मुद्दे आए अगर पिछड़ों के नाम पर आपने सरकार बनाई , अखिलेश जी ने पहले वादा किया था की निषादों को अनुसूचित में शामिल करेंगे जो यही गलत है हम पहले से शामिल थे हम परिभाषित करने का मामला था , कांग्रेस की धोखाबाजी , षड्यंत्र कारी नीति है और सबके साथ भेदभाव करना जो जातिय दल , क्षेत्रीय दल जो साथ आए, जब कांग्रेस के खिलाफ में खड़ा होकर सपा बड़ी हुई हैं तो दल तो एक साथ दिख सकते हैं लेकिन दिल नहीं दिख सकते। वहीं उन्होंने इंडिया आपसी गठबंधन के सवाल पर कैबिनेट मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा की ये आपके आंख के सामने है जो चीत बट में जो मनसे से जा रहे हैं बिना दूल्हे की बारात है दल तो एक जगह फोटो खिंचवा रहे हैं लेकिन दिल तो आप देख रहे हैं दिल की आवाज कैसे निकल रही है। इस तरह से आपस मे एक दूसरे के खून के प्यासे है। हम लोगों ने ईमानदारी से 39 पार्टियों ने यह तय किया है की आज के दिन मोदी के नेतृत्व में फिर चुनाव लड़ा जाएगा फिर से उन्हें प्रधानमंत्री बनाना है।
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