कभी शाहजहाँ ने अपनी पत्नी की याद में ताजमहल बनवाकर दुनिया में प्रेम की की मिशाल पेश की थी कुछ उसी तर्ज पर फतेहपुर जिले के बिन्दकी तहसील के पधारा गांव के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की मौत के बाद उसकी याद में एक मंदिर बना डाला और उसमे अपनी पत्नी की मूर्ति स्थापित करवा कर सुबह शाम दोनों वक्त अपनी पत्नी की पूजा करते है मृत पत्नी के प्रति उनका यह प्रेम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है
--महिला की मूर्ति के सामने खड़े होकर पूजा कर रहे इस व्यक्ति का नाम रामसेवक है सीजनल अमीन के पद से अवकाश प्राप्त राम सेवक है और मूर्ति किसी देवी की नहीं बल्कि उनकी दिवंगत पत्नी माया की है पत्नी के जीवित रहते रामसेवक अपनी पत्नी माया से बेपनाह मोहब्बत करते थे लेकिन १८मई २०२०को पत्नी की आकस्मिक मौत के बाद उनके जीवन में ऐसा खाली पन आया कि वे रहदम उदास रहने लगे पत्नी की याद में हमेशा खोये रहने वाले रामसेवक ने पत्नी की मौत के छः महीने बाद अपनी पत्नी माया की फोटो लेकर मरकाना पहुँचे और एक मूर्तिकार से अपनी पत्नी की एक मूर्ति बनवा डाली शुरू में घर बाहर एक चबूतरे पर उस मूर्ति को स्थापित करने के बाद अब उन्होंने उस स्थान पर बाकायदा एक एक मंदिर बनवा डाला और अब वे मंदिर में ही रहकर पत्नी की पूजा करते है
-रामसेवक --पत्नी भक्त
-तीन बेटों और दो पुत्रीयों के पिता रामसेवक का बड़ा बेटा रंजीत SSB में है रामसेवक के सभी बच्चे बड़े हो गये है लेकिन उनके बच्चे भी माँ के प्रति पिता के इस प्रेम में उनका पूरा साथ देते है मरहूम पत्नी के प्रति उनके इस प्रेम का गांव के तमाम लोग उनका उपहास जरूर उड़ाते है लेकिन पत्नी के प्रति प्रेम के दीवाने रामसेवक किसी बात की परवाह किये बगैर नियमित अपनी पत्नी की पूजा करते है और अब तो घर जाने के बजाय अपनी पत्नी के मंदिर में ही रात बिताते है पत्नी से प्रेम की मिशाले तमाम मिलती है किसी ने अपनी पत्नी के नाम पर स्कूल कालेज खोला तो किसी ने पत्नी के नाम पर धरमार्थ संस्था बना कर अपनी पत्नी के प्रति प्रेम का इजहार किया है और उसके नाम को जीवित रखने का प्रयास किया है लेकिन रामसेवक जिस तरीके से अपनी पत्नी की याद में मूर्ति और मंदिर बनाकर उसकी नियमित पूजा कर रहे है वह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है
