अमेरिका ने रूस–यूक्रेन संघर्ष को थामने के उद्देश्य से एक 28-बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव तैयार किया है। इस मसौदे में रूस को दोबारा जी-7 समूह में शामिल करने का सुझाव भी सामने आया है, जबकि उसे इससे पहले इसी मंच से बाहर कर दिया गया था। पुराने समय में यह समूह जी-8 के नाम से जाना जाता था।
लगभग छह महीने पहले आयोजित जी-7 सम्मेलन में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर हलचल मचा दी थी कि रूस को समूह से हटाना “एक बड़ी रणनीतिक भूल” थी। अब, अमेरिका की ओर से उसे वापस लाने की पहल शुरू होने के बाद कई तरह की चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं।
इस पूरी प्रक्रिया ने कई नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
क्या रूस की पुनः सदस्यता अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संतुलन को बदल देगी?
वैश्विक राजनीति और आर्थिक ढांचे पर इसका क्या असर पड़ेगा?
क्या इससे यूक्रेन युद्ध को रोकने की दिशा में कोई वास्तविक समाधान निकल सकेगा?