यूपी के फतेहपुर जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लिखी जाती है बाहर की दवाएं .

 देश के प्रधान मंत्री व प्रदेश के मुखिया योगी आदित्य नाथ जहाँ एक ओर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रयास में लगे है. तो वही दूसरी जानिब ज़िम्मेदार उसमे पलीता लगाने में लगे हुए है। जिसके चलते गाँव देहात से आने वाले मरीज़ों व उनके तीमारदारों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के जिला अस्पताल में बने ट्रामा सेंटर का है। जहां बकेवर थाना क्षेत्र के लालाबक्सरा गाँव निवासी राम शंकर द्विवेदी की माता भगवती देवी की तबियत खराब होने पर जिला अस्पताल इस उम्मीद से लेकर आये की उनकी माता को बेहतर इलाज मिलेगा। मगर ऐसा हुआ नही कमीसन खोरी के चलते उनको बाहर से कमीसन वाली दवा लाने के लिए पर्ची पकड़ा दी गई जिसकी कीमत 920 रुपए थी। मजबूर तीमारदार क्या करे उसको इलाज करवाना है। तीमारदार जैसे तैसे पैसे की ब्यवस्था करके 920 रुपए की बाहर से कमीसन वाली दवा लेकर आया। जिस पर मीडिया कर्मी की नज़र पड़ गई। पूँछ ने पर मालूम हुआ कि ट्रामा सेंटर एमरजेंसी के कम्पाउंडर द्वारा यह दवा लिखी गई है। वही जब इस सम्बन्ध में ट्रामा सेंटर में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका कहना था कि उनके द्वारा यह दवा नही लिखी गई क्यो की इस दवा की ज़रूरत ही नही है यह दवा अस्पताल में मौजूद है। अगर किसी कम्पाउंडर द्वारा यह लिखी गई है तो मैं उसके खिलाफ लिखित कार्यवाई करूंगा। अब देखने वाली बात यह है कि क्या इस सम्बन्ध कोई कार्यवाई होती है या यूँही सब चलता रहेगा। जब कि यह खेल कोई नया नही है यह खेल काफी समय से चल रहा है सिर्फ कार्यवाई की बात की जाती है होता कुछ नही क्यो की सब की हिस्सेदारी का जो सवाल है कार्यवाई होगी तो हिस्सेदारी कहाँ से आएगी। 


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